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पढ़ें, विरोध के बावजूद कैबिनेट में क्यों ‘दागी’ विधायक को सरकार में किया गया शामिल?

 पंजाब के नवनियुक्त मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) की कैबिनेट का आखिरकार रविवार को विस्तार हो गया. पंजाब सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार से कुछ घंटे पहले ही पंजाब कांग्रेस के नेताओं ने पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह के खिलाफ अपनी अवाज बुलंद कर दी. ‘दागी’ पूर्व मंत्री और कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह को कैबिनेट में शामिल किए जाने से पंजाब में कांग्रेसियों के एक वर्ग के बीच मतभेद का एक नया दौर शुरू हो सकता है क्योंकि कुछ वरिष्ठ विधायकों ने उनके कैबिनेट मंत्री बनने पर खासी नाराजगी जाहिर की थी.

गुरजीत सिंह के शामिल होने से पहले ही विपक्ष को चरणजीत सिंह चन्नी सरकार पर गोलियां दागने का मौका मिल गया. शपथ ग्रहण समारोह से ठीक पहले तब एक दिलचस्प मोड़ सामने आया, जब रिपोर्ट सामने आई कि विधायकों के एक वर्ग द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद सिंह का नाम संभावित मंत्रियों की लिस्ट से हटा दिया गया है. राज्य के पूर्व कांग्रेस प्रमुख मोहिंदर सिंह कापी और सुखपाल सिंह खैरा सहित अन्य विधायकों द्वारा लिखे गए एक पत्र में कहा गया कि गुरजीत सिंह को कैबिनेट में शामिल करने के फैसले का विरोध किया जाएगा.

अमरिंदर सिंह कैबिनेट से 2018 में दिया था इस्तीफा

दागी नेता राणा गुरजीत सिंह को 2018 में कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. उनके ऊपर रेत खनन अनुबंधों की नीलामी में अनियमितता के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ा था. बाद में उन्होंने अमरिंदर सिंह कैबिनेट से अपना इस्तीफा दे दिया था. उस समय, उनके पास सिंचाई और बिजली विभाग थे. सूत्रों का मानना है कि कांग्रेस आलाकमान के साथ उनके नजदीकी संबंध की वजह से उन्हें कैबिनेट में जगह मिली है.

हालांकि दोआबा के राजनेता गुरजीत सिंह (Gurjit Singh) को मंत्रिमंडल में शामिल करना कांग्रेस आलाकमान के लिए क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिहाज से भी जरूरी था क्योंकि मुख्यमंत्री चन्नी और राज्य इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) दोनों मालवा से संबंधित हैं, जबकि दो डिप्टी सीएम माझा क्षेत्र के हैं. जबकि दोआबा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी जरूरी था. इसलिए राणा गुरजीत सिंह को कैबिनेट में जगह दी गई, गुरजीत सिंह दोआबा क्षेत्र की नुमाइंदगी करेंगे.

कपूरथला से तीन बार रह चुके हैं विधायक

65 वर्षीय गुरजीत सिंह कपूरथला से तीन बार विधायक रह चुके हैं और यूपी के उस हिस्से से व्यवसायी भी हैं, जो अब उत्तराखंड में आता है. कांग्रेस के दिग्गज सिंह 1989 में पंजाब चले गए थे. शराब और चीनी कारोबारी सिंह रोपड़ में एक पेपर मिल के भी मालिक हैं. वह 2017 के पंजाब चुनावों में 170 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर उम्मीदवार थे. वह 2002 में कपूरथला से विधायक बने. 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे नरेश गुजराल को हराकर वो जालंधर से सांसद बने थे.

उन्होंने 2017 में अमरिंदर सिंह सरकार में रहते हुए बिजली और सिंचाई मंत्री के रूप में भी कार्य किया था. हालांकि, वह रेत खदान आवंटन को लेकर एक कथित घोटाले में फंस गए, जिसके बाद उन्हें जनवरी 2018 में इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था. हालांकि, सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि तत्कालीन सीएम कैप्टन अमरिंदर द्वारा की गई जांच में उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिल सके थे